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रक्षाबंधन पर बन रहा सुकर्मा योग और शतभिषा नक्षत्र का दुर्लभ महासंयोग, बहनें शुभ मुहुर्त में ही बांधें राखी: यायावर धनराज तिवारी

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A rare and auspicious celestial alignment of 'Sukarma Yoga' and 'Shatabhisha Nakshatra' is forming on Raksha Bandhan; sisters should tie the Rakhi only during the auspicious time: Yayavar Dhanraj Tiwari

mahendra india news, new delhi
भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। रक्षाबंधन को लेकर जहां बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं, वहीं ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस वर्ष का रक्षाबंधन विशेष माना जा रहा है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग और शतभिषा नक्षत्र का विशेष महासंयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन भद्रा का साया भी नहीं रहेगा, जिसके कारण रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ समय को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। प्रबल महाराज के शिष्य यायावर धनराज तिवारी ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर बनने वाला सुकर्मा योग धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। सुकर्मा योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं शतभिषा नक्षत्र भी इस दिन की धार्मिक महत्ता को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व पर शुभ योग और अनुकूल नक्षत्र का होना भाई-बहन के रिश्ते के लिए मंगलकारी माना जाता है।

कब रहेगा राखी बांधने का मुहुर्त:
यायावर धनराज तिवारी के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा। यह अवधि लगभग 3 घंटे 51 मिनट की होगी। इस दौरान बहनें विधि-विधान के साथ अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि भी सुबह 9:48 बजे तक रहेगी, इसलिए पूर्णिमा तिथि के दौरान रक्षासूत्र बांधना विशेष शुभ माना जाएगा।

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उन्होंने कहा कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। भद्रा को परंपरागत रूप से राखी बांधने के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता है। ऐसे में भद्रा की अनुपस्थिति के कारण पर्व के शुभ समय को लेकर किसी प्रकार की बाधा नहीं रहेगी। बहनों को सलाह दी गई है कि वे सुबह के शुभ मुहूर्त में ही भाई की कलाई पर राखी बांधने का प्रयास करें। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। यायावर धनराज तिवारी ने बताया कि राहुकाल में शुभ कार्य करने से सामान्यत: बचने की परंपरा है। इसलिए यदि राखी बांधने का कार्य सुबह के शुभ मुहूर्त में कर लिया जाए तो यह अधिक उत्तम रहेगा।


ऐसे करें बहनें तैयारी:
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन बहनों को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा की थाली तैयार करनी चाहिए। थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखी जा सकती है। सबसे पहले भगवान का स्मरण कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करनी चाहिए। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसकी आरती उतारनी चाहिए और दाहिनी कलाई पर राखी बांधकर उसके मंगलमय जीवन की कामना करनी चाहिए। यायावर धनराज तिवारी ने कहा कि राखी का धागा केवल एक धागा नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। बहन भाई की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती है। वहीं भाई भी अपनी बहन के सम्मान, सुरक्षा और सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन का पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने वाला पर्व है।

आज के आधुनिक समय में परिवार के सदस्य रोजगार और अन्य कारणों से अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं, ऐसे में रक्षाबंधन जैसे पर्व परिवारों को फिर से एक साथ जोड़ने का कार्य करते हैं। यह पर्व रिश्तों में प्रेम और अपनापन बढ़ाने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को रक्षाबंधन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि हमारी परंपराएं आगे भी इसी प्रकार जीवित रहें।

यायावर धनराज तिवारी  ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व हमें यह संदेश देता है कि रिश्ते केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी से मजबूत होते हैं। भाई-बहन का रिश्ता जीवन के सबसे अनमोल रिश्तों में से एक है। रक्षाबंधन इसी रिश्ते को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने सभी भाई-बहनों से अपील की कि वे रक्षाबंधन को श्रद्धा और सादगी के साथ मनाएं। बहनें शुभ मुहूर्त में राखी बांधें और भाई अपनी बहन को सम्मान एवं स्नेह का उपहार दें। साथ ही परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान से परिवार में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।