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Diwali 2026: माता लक्ष्मी ने कुबेर को क्यों बनाया धन का देवता? जानिए रोचक पौराणिक कथा

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mahendra india news, new delhi
दीपावली पर्व का हर साल इंतजार रहता है। इस वर्ष दीपावली पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन घरों में माता लक्ष्मी की घर घर में पूजा होती है। हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वहीं, भगवान कुबेर को धन का देवता और देवताओं के खजाने का रक्षक या खजांची कहा जाता है।

ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, संसार में धन-संपदा का वितरण और उसकी सुरक्षा करने का दायित्व भगवान कुबेर के पास है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माता लक्ष्मी ने तीनों लोकों के खजाने की जिम्मेदारी कुबेर देव को ही क्यों सौंपी थी? इसके पीछे एक रोचक पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है।

यही नहीं इसके पीछे कुबेर की घोर तपस्या से जुड़ा एक रहस्य भी है जिसकी वजह से आज भी कुबेर को धन के देवता के रूप में पूजा जाता है। आइए आपको बताते हैं कुबेर के धन का देवता बनने के पीछे की कहानी।

ऐसे बने भगवान कुबेर धन के देवता?
पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कुबेर को धन का देवता बनने का आशीर्वाद सबसे पहले भगवान शिव ने दिया था। ऐसा कहा जाता है कि कुबेर ने अपने अगले जन्म में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उन्हें अपार धन-संपदा का वरदान दिया।

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इसके बाद माता लक्ष्मी के कहने पर ब्रह्मा जी ने कुबेर को देवताओं के खजाने की जिम्मेदारी सौंपी और उन्हें देवताओं का खजांची बना दिया। यही नहीं कुबेर को तीनों लोकों की धन-संपदा की रक्षा और उसके उचित प्रबंधन का दायित्व दिया गया। इस तरह भगवान शिव के आशीर्वाद, माता लक्ष्मी की कृपा और ब्रह्मा जी की जिम्मेदारी से कुबेर धन के देवता के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

जानें माता लक्ष्मी और कुबेर का संबंध
माता लक्ष्मी धन की देवी हैं और भगवान कुबेर देवताओं के खजाने की रक्षा करने वाले देवता हैं। वो उनके धन का हिसाब-किताब रखते हैं और उन्हें इसकी शक्ति माता लक्ष्मी से ही मिलती है। इनके बीच के संबंध को आसान शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है कि माता लक्ष्मी चाहें तो बंजर जमीन को भी सोने में बदल सकती हैं, लेकिन कुबेर सिर्फ धन के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। कुबेर धन को अपनी तिजोरी में रख सकते हैं।

चूंकि माता लक्ष्मी ने ही कुबेर को धन के देवता होने का वरदान दिया था, इसलिए उन्हें आज भी धन के रूप में सर्वोपरि स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं में माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की भूमिका अलग-अलग है। माता लक्ष्मी धन की मूल शक्ति और समृद्धि की देवी हैं, जबकि कुबेर उस धन के संरक्षक हैं।

माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का महत्व
दिवाली के पांच दिनों में मुख्य रूप से कुबेर जी के साथ माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है और ऐसा माना जाता है कि जहां माता लक्ष्मी की पूजा से घर में धन और समृद्धि आती है, वहीं कुबेर जी की पूजा करने से धन की रक्षा होती है।

पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि इसी मान्यता के कारण दीपावली के अवसर पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। जहां माता लक्ष्मी से घर में सुख-समृद्धि और धन के आगमन की कामना की जाती है, वहीं कुबेर देव से अर्जित धन की रक्षा, स्थिरता और सही जगह पर इसका उपयोग करने का आशीर्वाद मांगा जाता है।

माता लक्ष्मी और कुबेर का संबंध केवल धन प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि धन के संरक्षण और सदुपयोग का भी संदेश देता है। दोनों ही देवी-देवताओं की पूजा से समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।