home page

इस दिन मनाई जाएगी एकदंत संकष्टी चतुर्थी, हर मुश्किलें होगी दूर, जाने पूजा विधि और चंद्रोदय का समय

 | 
 इस दिन मनाई जाएगी एकदंत संकष्टी चतुर्थी, हर मुश्किलें होगी दूर, जाने पूजा विधि और चंद्रोदय का समय
mahendra india news, new delhi

हर साल एकदंत संकष्टी चतुर्थी का इंतजार रहता है। मई माह के अंदर  एकदंत संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। मई 2026 में आने वाली यह चतुर्थी और भी विशेष खास है, क्योंकि यह मंगलवार के दिन आ रही है। 
वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी।
वहीं, चतुर्थी तिथि का समापन 6 मई 2026 को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में पंचांग को देखते हुए ज्येष्ठ माह की संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 मई को रखा जाएगा।

ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को 'संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है, इसका मतलब है कि संकटों को हरने वाली चतुर्थी। ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार को आने वाली चतुर्थी को 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है, जिसका फल अन्य चतुर्थी से कई गुणा ज्यादा माना गया है। 

जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
अर्घ्य विधि - एक तांबे के पात्र में जल, अक्षत और लाल पुष्प डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।


इसलिए खास है यह व्रत?
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से कर्ज और पारिवारिक कलह का नाश होता है, क्योंकि यह अंगारकी चतुर्थी है, इसलिए इस दिन मंगल देव की भी कृपा प्राप्त होती है, जिससे भूमि और संपत्ति से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं।

WhatsApp Group Join Now


जाने पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाने के बाद लाल वस्त्र पहनें।
भगवान गणेश जी के सामने व्रत का संकल्प लें।
भगवान गणेश की प्रतिमा को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
भगवान गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं, क्योंकि सिंदूर गणेश जी को बहुत प्रिय है।
गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें।
भोग के रूप में मोदक या गुड़ से बनी चीजें चढ़ाएं।
पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नम:' या 'श्री गणेशाय नम:' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
चंद्रोदय और अर्घ्य का वक्त 
चंद्रोदय रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा।