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पूर्व मंत्री एवं हलोपा अध्यक्ष गोपाल कांडा परिवार सहित शक्ति पीठ अंबाबाई में, आध्यात्मिक एवं धार्मिक यात्राओं की जीवन में महती भूमिका - गोपाल

 
Former Minister and Halopa President Gopal Kanda with his family at Shakti Peeth Ambabai, spiritual and religious travels play an important role in life - Gopal
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 Former Minister and Halopa President Gopal Kanda with his family at Shakti Peeth Ambabai, spiritual and religious travels play an important role in life - Gopal

mahendra india news, new delhi
HARYANA प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं हरियाणा लोकहित पार्टी के अध्यक्ष गोपाल कांडा ने कहा कि देश में सोमनाथ से जगन्नाथ धाम और कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रतिष्ठित मंदिर सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। प्रत्येक धर्म स्थल स्वयमेव अनूठी ऊर्जा के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक एवं धार्मिक यात्राओं की जीवन में महती भूमिका है।


गोपाल कांडा ने महाराष्ट्र के कोल्‍हापुर स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर (अंबाबाई मंदिर) के सपरिवार दर्शन किए। धार्मिक यात्राओं के क्रम में पूर्व मंत्री गोपाल कांडा धर्मपत्नी सरस्वती कांडा संग माता के शक्ति पीठों में शामिल इस दिव्य एवं पर प्राचीनतम धाम में पहुंचे। गोपाल कांडा के साथ उनके समधी व दिल्ली के प्रसिद्ध उद्योगपति सुभाष गोयल, दामाद पुनीत नारंग एवं राहुल गोयल तथा पुत्र लखराम कांडा सहित अन्य पारिवारिक सदस्य मौजूद थे। पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने  इस मंदिर में स्‍थापित माता लक्ष्मी की हजारों साल पुरानी प्रतिमा के दर्शन और पूजन किया।

मंदिर के अन्दर नवग्रहों सहित, भगवान सूर्य, महिषासुर मर्दिनी, विट्टल रखमाई, शिवजी, विष्णु, तुलजा भवानी आदि अनेक देवी देवताओं के दिव्य एवं प्राचीन स्वरूपों का पूजन किया। पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने मां भगवती के शक्ति पीठों में शामिल श्री महालक्ष्मी के दिव्य धाम में क्षेत्रवासियों के मंगल की कामना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

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उल्लेखनीय है कि  इस मंदिर का स्‍थापत्‍य अत्‍यंत भव्‍य और प्रभावशाली है। यहां एक काले पत्थर के मंच पर देवी महालक्ष्मीजी की चतुर्हस्त वाली प्रतिमा, सिर पर मुकुट पहने हुए स्‍थापित है। माता की प्रतिमा को बहुमूल्‍य गहनों से सजाया गया है। उनका मुकुट भी लगभग चालीस किलोग्राम वजन का है जो बेशकीमती रत्‍नों से जड़ित है। काले पत्थर से निर्मित महालक्ष्मी की प्रतिमा की ऊंचाई करीब 3 फीट है। मंदिर की एक दीवार पर श्री यंत्र पत्थर पर उकेरा गया है।

देवी की मूर्ति के पीछे पत्‍थर से बनी उनके वाहन शेर की प्रतिमा भी मौजूद है। वहीं देवी के मुकुट में भगवान विष्णु के प्रिय सर्प शेषनाग का चित्र बना हुआ है। खास बात है कि अन्य मंदिरों से अलग पूरब या उत्तर दिशा की बजाए यहां महालक्ष्मी पश्चिम दिशा की ओर मुख  स्‍थापित हैं। देवी के सामने की पश्चिमी दीवार पर एक छोटी सी खुली खिड़की है, जिससे होकर सूरज की किरणें देवी लक्ष्मी का पद अभिषेक करते मध्य भाग पर आती हैं और अंत में  मुखमंडल को रोशन करती हैं।