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गणेश चतुर्थी: गणेश जी की पूजा में क्यों नहीं चढ़ाई जाती है तुलसी? जानिए कथा

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mahendra india news, new delhi
प्रथम भगवान गणेश जी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वैसे देखें तो हर साल गणेश पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भाद्रवा माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश उत्सव की शुरुआत होने जा रही है, देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. हर कोई अपने घर में बप्पा को बिठाने और उनकी विधिवत पूजा करने के लिए उत्सुक है

वैसे तो भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, मोदक और लाल फूल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं. लेकिन शास्त्रों के अनुसार गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना पूरी तरह वर्जित माना गया है. इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और पौराणिक कथा जुड़ी हुई है


गणेश चतुर्थी 2026 की शुभ तिथि और मुहूर्त

ज्योतिषचार्य लालचंद शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 7:06 बजे से हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 15 सितंबर, मंगलवार को सुबह 7:44 बजे होगा. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश जी का जन्म दोपहर यानी मध्याह्न काल में हुआ था. इसी कारण से 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाएगा. इस दिन बप्पा की स्थापना कर पूजा करना सबसे फलदायी रहेगा.

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तपस्या में लीन गणेश जी और देवी तुलसी का आगमन
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश नदी किनारे गहरे ध्यान में लीन थे. वे सुंदर वस्त्र धारण किए हुए थे और उनके गले में दिव्य माला सुशोभित थी. 

उसी समय वहां से देवी तुलसी गुजर रही थीं. बप्पा के अत्यंत तेजस्वी और आकर्षक रूप को देखकर तुलसी जी उन पर मोहित हो गईं

उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा जागृत हुई. विवाह का प्रस्ताव रखने के लिए तुलसी जी ने ध्यान में लीन गणेश जी की तपस्या को भंग कर दिया.

विवाह के प्रस्ताव पर बढ़ा दोनों का विवाद
ध्यान भंग होने के बाद जब गणेश जी ने आंखें खोलीं, तो तुलसी जी ने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा. गणेश जी ने खुद को ब्रह्मचारी बताते हुए बहुत ही विनम्रता से विवाह करने से मना कर दिया. 

इस बात से तुलसी जी अत्यंत क्रोधित हो गईं. उन्होंने गुस्से में आकर गणेश जी को श्राप दे दिया कि आपकी इच्छा के विरुद्ध आपके दो विवाह होंगे

इस अकारण मिले श्राप से भगवान गणेश भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी जी को पलटकर श्राप दे दिया.

गणेश जी का श्राप और तुलसी जी की क्षमा याचना
गणेश जी ने तुलसी जी को श्राप दिया कि तुम्हारा विवाह किसी देवता से नहीं बल्कि एक असुर से होगा. एक राक्षस की पत्नी बनने का भयानक श्राप सुनते ही तुलसी जी का गुस्सा शांत हो गया. 

अपनी गलती का अहसास होते ही उन्होंने तुरंत गणेश जी से हाथ जोडक़र क्षमा मांगी. तुलसी जी की प्रार्थना सुनकर गणेश जी का दिल पिघल गया. 

उन्होंने कहा कि तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय बनोगी और कलयुग में मोक्ष दोगी.

तुलसी क्यों वर्जित हुई गणेश पूजन में?
गणेश जी ने तुलसी जी को माफी देते हुए यह शर्त भी रखी कि मेरी पूजा में तुम्हारा उपयोग कभी नहीं किया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि गणेश पूजन में तुलसी पत्र चढ़ाना बेहद अशुभ माना जाएगा. 

यही कारण है कि आज भी गणेश चतुर्थी या किसी भी नियमित पूजा में गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती. बप्पा की कृपा पाने के लिए पूजा में हमेशा केवल हरी दूर्वा घास ही अर्पित करनी चाहिए.

नोट : ये जानकारी पौराणिक कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषाचार्यों के बयानों पर आधारित एक विवरणात्मक रिपोर्ट के आधार पर हैं, इस लेख का उद्देश्य पाठकों तक भारतीय धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है। धन्यवाद