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हरिद्वार सोमवती अमावस्या स्नान || आस्था का महासैलाब || Haridwar latest video || haridwar live

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आज सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या है। इस दिन का हिंदू धर्म में खास महत्व है। जब अमावस्या की तिथि सोमवार को पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता हैं। यह दिन भगवान भोले शिव की पूजा, पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों को करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। इस सोमवती अमावस्या के अवसर पर खरीदारी से अधिक दान-पुण्य पर जोर दिया जाता है। इस खास दिन पर अन्न, कपड़े, दान-दक्षिण और जरूरतमंदों की सेवा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पितरों की आत्मा भी प्रसन्न होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ खास वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इस तरह की मान्यताएं शास्त्रों में तो वर्णित नहीं हैं, लेकिन लोकपरंपराएं और धार्मिक आस्था इन्हें बल देती हैं।

आज है अमावस्या 
सोमवती अमावस्या की शुरुआत रविवार दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होकर आज 15 जून सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 पर होगा। उदिया तिथि के आधार पर इस 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जा रही है। क्योंकि इस इस दिन सोमवार पड़ रहा है।

सोमवती अमावस्या के दिन क्या खरीदने से बचें?
सोमवती अमावस्या के दिन नये कपड़े और जूते-चप्पल कई परंपराओं में माना जाता है कि, सोमवती अमावस्या के दिन भौतिक वस्तुओं की खरीदारी की बजाय पूजा, व्रत और दान से जुड़ी चीजें खरीदनी चाहिए। अमावस्या के दौरान नए कपड़े और जूते खरीदने से बचने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि ये भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी वस्तुएं हैं।

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सोना-चांदी और महंगी वस्तुएं
हिंदू धर्म ग्रंथों में इसे लेकर कोई साफ निषेध नहीं बताया गया है, लेकिन ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन बड़े निवेश या विलासिता से जुड़ी खरीदारी से बचाना चाहिए। इसकी जगह दान और धार्मिक कार्य को करने की सलाह दी जाती है।
सोमवती अमावस्या एक ऐसा दिन जो सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह देता है। इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख देखने को मिलता है कि, अमावस्या या किसी भी पवित्र अवसर पर तामसिक भोजन को ग्रहण नहीं करना चाहिए।

धार्मिक जानकारों का मानना है कि, इस दिन पूजा की भव्यता से अधिक महत्व श्रद्धा और आस्था का है। इसलिए जरूरत से अधिक पूजा सामग्री खरीदने के बजाए सरलता के साथ पूजा अर्चना करें। पीपल के पेड़ को पूजे, शिव आराधना और दान को ज्यादा महत्व दें।