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दशहरा पर्व पर सिर्फ 45 मिनट का अच्छा मुहूर्त, जानें कैसे करें श्री राम की पूजा

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Only a 45-minute auspicious window (muhurat) on the festival of Dussehra; learn how to perform the worship of Lord Ram

mahendra india news, new delhi
देशभर मेें आज विजयादशमी का त्योहार बड़े उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों व घरों में विशेष पूजा की जा रही है। ज्योषिचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 के दिन दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो जाएगी। दशमी तिथि का समापन 21 अक्टूबर के दिन दोपहर में 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि में दशमी 21 अक्टूबर को पड़ रही है। 


उन्होंंने बताया कि दोपहर में दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र का संयोग जिस दिन बनता है, उस दिन विजयादशमी दशमी मनाना चाहिए। ऐसे में इस वर्ष 20 अक्टूबर के दिन अपराह्न काल (दोपहर) में दशमी तिथि और श्रवण योग का संयोग मिल रहा है। उदया तिथि में दशमी तिथि 21 अक्टूबर के दिन मिल रही है लेकिन इस दिन श्रवण नक्षत्र का अभाव रहेगा। इसलिए दशहरा पूजा 20 अक्टूबर के दिन करना उत्तम माना जा रहा है।

हिंदू पंचांग के मुताबिक 19 अक्टूबर 2026 के दिन दोपहर में 3 बजकर 39 मिनट से श्रवण नक्षत्र शुरू होगा, जिसका समापन 20 अक्टूबर को शाम में 6 बजकर 02 मिनट पर होगा। स्थानीय पंचांग के अनुसार, समय में कुछ अंतर देखा जा सकता है।

श्री राम के मंत्र

  • श्रीरामचन्द्राय नम:
  • रामाय नम:
  • ह्रीं राम ह्रीं राम
  • क्लीं राम क्लीं राम
  • फट् राम फट्

सुबह के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:44 से 05:34 बजे

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प्रात: सन्ध्या: सुबह 05:09 से 06:25 बजे

अमृत काल: सुबह 06:35 से 08:21 बजे

अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 से 12:28 बजे

दोपहर के शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:59 से दोपहर 02:45 बजे

शाम के शुभ मुहूर्त
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:47 बजे से 06:12 बजे

सायाह्न सन्ध्या: शाम 05:47 बजे से 07:02 बजे

रात के शुभ मुहूर्त
निशिता मुहूर्त: रात 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 21

दशहरे पर शस्त्र की पूजा कब करना शुभ रहेगा?
दशहरएके दिन दोपहर यानि अपराह्न काल या विजय मुहूर्त में शस्त्रों की पूजा करना उत्तम मानी जाती है।

21 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
अपराह्न पूजा का समय - 01:14 पी एम से 03:30 पी एम

अवधि - 02 घण्टे 16 मिनट्स

श्री राम की पूजा विधि
1- स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें

2- भगवान श्री राम का जलाभिषेक करें

3- प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें

4- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें

5- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें

6- पूरी श्रद्धा के साथ श्री राम जी और मां दुर्गा की आरती करें

7- प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं

8- अंत में क्षमा प्रार्थना करें