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आनंद सरोवर सिरसा में आध्यात्मिक कार्यक्रम का समापन, राजयोग से जीवन में सफलता पाने की दी प्रेरणा

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mahendra india news, new delhi

ब्रह्माकुमारीज़ आनन्द सरोवर में राजयोगिनी बिन्दू दीदी जी के निर्देशन में चले दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन का  1 नवम्बर की सांय सफलतपपूर्वक समापन हुआ जिसमें संस्थान के नियमित साधकों तथा शहर की गणमान्य हस्तियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम में संंस्था के मुख्यालय माउंट आबू  से पधारे ब्रह्माकुमारीज़ के चार्टर्ड अकाउंटैंट बी के ललित जी ने बतौर मुख्य वक्ता सभा को सम्बोधित किया और सफल आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।

आनन्द सरोवर में दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन हुआ सम्पन्न राजयोगी सी ए ललित जी ने बताए राजयोग द्वारा सम्पूर्ण सफलता के गुर  ब्रह्माकुमारीज़ आनन्द सरोवर में राजयोगिनी बिन्दू दीदी जी के निर्देशन में चले दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन का  1 नवम्बर की सांय सफलतपपूर्वक समापन हुआ जिसमें संस्थान के नियमित साधकों तथा शहर की गणमान्य हस्तियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम में संंस्था के मुख्यालय माउंट आबू  से पधारे ब्रह्माकुमारीज़ के चार्टर्ड अकाउंटैंट बी के ललित जी ने बतौर मुख्य वक्ता सभा को सम्बोधित किया और सफल आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। नियमित साधकों के लिए आयोजित -- अन्तर्मुखता की गुफा-- विषय पर अपना वक्तव्य देते हुए उन्होंनें अपने भीतर हर परिस्थिति के प्रति स्वीकार भाव पैदा करके स्व निरीक्षण की गहराई को सपष्ट किया और आत्म तथा परमात्म शक्ति के साथ आध्यात्म के मार्ग पर निरन्तर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी। शहर के प्रबुद्ध जनों के लिए आयोजित --राजयोग द्वारा सम्पूर्ण सफलता-- विषय पर अपने अनुभवयुक्त उदबोधन से बी के ललित जी ने उपस्थित सभा को सफल जीवन के लिए कई प्रभावशाली गुर सिखाए और नियमित मेडिटेशन को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि रोजाना कम से कम एक सौ एक दुआएं देने, मन में कृतज्ञता का भाव लाते हुए प्रकृति सहित हर व्यक्ति का 51 बार धन्यवाद करने तथा 21 बार अपने परिजनों सहित सबकी प्रशंसा एवं उत्साहवर्धन करने से हमारे मन की सकारात्मक उर्जा का प्रवाह वातावरण में फैलने लगता है और हमारे भीतर निर्णय शक्ति मजबूत होती है। इस मौके आनन्द सरोवर सर्कल, सिरसा की मुख्य राजयोगिनी बिन्दू दीदी ने बच्चों को भौतिक साधनों के साथ-साथ सुसंस्कार देने की आवश्यकता को समय की मांग बताते हुए कहा कि आज हम बच्चे को कार नहीं देते तो वो थोड़ा समय दु:खी होगा लेकिन अगर सुसंस्कार देने में असमर्थ रहे तो बच्चे और अभिभावक दोनो को आजीवन विभिन्न प्रकार की समस्याओं का समना करना पड़ता है जिसके दुखद परिणामस्वरूम आज पारिवारिक सम्बंधों में आपसी सामंजस्य कम होता जा रहा है। इसके लिए जरूरी है कि सभी अभिभावक स्वयं का जीवन मूल्यनिष्ठ बना कर अपनी पीढ़ी के लिए आदर्श बनने का प्रयास करें।   कार्यक्रम में उपस्थित हुए शहर के प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटैंट श्री धर्मेश स्वामी जी ने भी अपने विचार रखे और कहा कि यह आयोजन मेरे जीवन का सुखद अनुभव है जो मुझे सदा स्मरण रहेगा। इसके साथ-साथ उन्होंने बी के ललित जी के उदबोधन से मिलने वाली प्रेरणाओं को अपने व्यावसायिक जीवन में सफलता का महत्वपूर्ण स्त्रोत बताया।


नियमित साधकों के लिए आयोजित -- अन्तर्मुखता की गुफा-- विषय पर अपना वक्तव्य देते हुए उन्होंनें अपने भीतर हर परिस्थिति के प्रति स्वीकार भाव पैदा करके स्व निरीक्षण की गहराई को सपष्ट किया और आत्म तथा परमात्म शक्ति के साथ आध्यात्म के मार्ग पर निरन्तर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।


शहर के प्रबुद्ध जनों के लिए आयोजित --राजयोग द्वारा सम्पूर्ण सफलता-- विषय पर अपने अनुभवयुक्त उदबोधन से बी के ललित जी ने उपस्थित सभा को सफल जीवन के लिए कई प्रभावशाली गुर सिखाए और नियमित मेडिटेशन को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि रोजाना कम से कम एक सौ एक दुआएं देने, मन में कृतज्ञता का भाव लाते हुए प्रकृति सहित हर व्यक्ति का 51 बार धन्यवाद करने तथा 21 बार अपने परिजनों सहित सबकी प्रशंसा एवं उत्साहवर्धन करने से हमारे मन की सकारात्मक उर्जा का प्रवाह वातावरण में फैलने लगता है और हमारे भीतर निर्णय शक्ति मजबूत होती है।

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आनन्द सरोवर में दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन हुआ सम्पन्न राजयोगी सी ए ललित जी ने बताए राजयोग द्वारा सम्पूर्ण सफलता के गुर  ब्रह्माकुमारीज़ आनन्द सरोवर में राजयोगिनी बिन्दू दीदी जी के निर्देशन में चले दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन का  1 नवम्बर की सांय सफलतपपूर्वक समापन हुआ जिसमें संस्थान के नियमित साधकों तथा शहर की गणमान्य हस्तियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम में संंस्था के मुख्यालय माउंट आबू  से पधारे ब्रह्माकुमारीज़ के चार्टर्ड अकाउंटैंट बी के ललित जी ने बतौर मुख्य वक्ता सभा को सम्बोधित किया और सफल आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। नियमित साधकों के लिए आयोजित -- अन्तर्मुखता की गुफा-- विषय पर अपना वक्तव्य देते हुए उन्होंनें अपने भीतर हर परिस्थिति के प्रति स्वीकार भाव पैदा करके स्व निरीक्षण की गहराई को सपष्ट किया और आत्म तथा परमात्म शक्ति के साथ आध्यात्म के मार्ग पर निरन्तर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी। शहर के प्रबुद्ध जनों के लिए आयोजित --राजयोग द्वारा सम्पूर्ण सफलता-- विषय पर अपने अनुभवयुक्त उदबोधन से बी के ललित जी ने उपस्थित सभा को सफल जीवन के लिए कई प्रभावशाली गुर सिखाए और नियमित मेडिटेशन को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि रोजाना कम से कम एक सौ एक दुआएं देने, मन में कृतज्ञता का भाव लाते हुए प्रकृति सहित हर व्यक्ति का 51 बार धन्यवाद करने तथा 21 बार अपने परिजनों सहित सबकी प्रशंसा एवं उत्साहवर्धन करने से हमारे मन की सकारात्मक उर्जा का प्रवाह वातावरण में फैलने लगता है और हमारे भीतर निर्णय शक्ति मजबूत होती है। इस मौके आनन्द सरोवर सर्कल, सिरसा की मुख्य राजयोगिनी बिन्दू दीदी ने बच्चों को भौतिक साधनों के साथ-साथ सुसंस्कार देने की आवश्यकता को समय की मांग बताते हुए कहा कि आज हम बच्चे को कार नहीं देते तो वो थोड़ा समय दु:खी होगा लेकिन अगर सुसंस्कार देने में असमर्थ रहे तो बच्चे और अभिभावक दोनो को आजीवन विभिन्न प्रकार की समस्याओं का समना करना पड़ता है जिसके दुखद परिणामस्वरूम आज पारिवारिक सम्बंधों में आपसी सामंजस्य कम होता जा रहा है। इसके लिए जरूरी है कि सभी अभिभावक स्वयं का जीवन मूल्यनिष्ठ बना कर अपनी पीढ़ी के लिए आदर्श बनने का प्रयास करें।   कार्यक्रम में उपस्थित हुए शहर के प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटैंट श्री धर्मेश स्वामी जी ने भी अपने विचार रखे और कहा कि यह आयोजन मेरे जीवन का सुखद अनुभव है जो मुझे सदा स्मरण रहेगा। इसके साथ-साथ उन्होंने बी के ललित जी के उदबोधन से मिलने वाली प्रेरणाओं को अपने व्यावसायिक जीवन में सफलता का महत्वपूर्ण स्त्रोत बताया।
इस मौके आनन्द सरोवर सर्कल, सिरसा की मुख्य राजयोगिनी बिन्दू दीदी ने बच्चों को भौतिक साधनों के साथ-साथ सुसंस्कार देने की आवश्यकता को समय की मांग बताते हुए कहा कि आज हम बच्चे को कार नहीं देते तो वो थोड़ा समय दु:खी होगा लेकिन अगर सुसंस्कार देने में असमर्थ रहे तो बच्चे और अभिभावक दोनो को आजीवन विभिन्न प्रकार की समस्याओं का समना करना पड़ता है जिसके दुखद परिणामस्वरूम आज पारिवारिक सम्बंधों में आपसी सामंजस्य कम होता जा रहा है। इसके लिए जरूरी है कि सभी अभिभावक स्वयं का जीवन मूल्यनिष्ठ बना कर अपनी पीढ़ी के लिए आदर्श बनने का प्रयास करें।  


कार्यक्रम में उपस्थित हुए शहर के प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटैंट श्री धर्मेश स्वामी जी ने भी अपने विचार रखे और कहा कि यह आयोजन मेरे जीवन का सुखद अनुभव है जो मुझे सदा स्मरण रहेगा। इसके साथ-साथ उन्होंने बी के ललित जी के उदबोधन से मिलने वाली प्रेरणाओं को अपने व्यावसायिक जीवन में सफलता का महत्वपूर्ण स्त्रोत बताया।