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शिव महापुराण कथा में भोले शंकर की महिमा का किया गुणगान, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

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The glory of Bhole Shankar was praised in the Shiva Mahapuran Katha, devotees danced to the hymns

mahendra india news, new delhi
भगवान शिव चैरिटेबल संस्थान द्वारा मुलतानी कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में 39वां वार्षिक महाशिवरात्रि सात दिवसीय महोत्सव के पांचवें दिन श्री महाशिव कथा दौरान प्रचवन करते हुए कथा व्यास गिरीशानंद शास्त्री ने भोले शंकर की महिमा का गुणगान किया। इस दौरान कथा व्यास का मंदिर के पुजारी केदारनाथ शर्मा व प्रधान धर्मपाल मेहता, मुकेश मेहता ने पुष्प माला पहनाकर अभिनंदन किया।

तत्पश्चात कथा व्यास ने कहा कि भगवान शंकर के लिए भी गणपति महाराज प्रथम पूजनीय थे। भगवान ने स्वयं यह वरदान उन्हें दिया था तथा वे एक बार इस बात की अवहेलना कर विपत्ति का शिकार हुए। सर्वप्रथम भगवान शिव ने ही गणेश पूजन किया था। कथा व्यास गिरीशानंद शास्त्री ने एक रोचक प्रसंग सुनाया कि जब भगवान शंकर द्वारा गणेश जी का शीश काटा गया तो काफी बवाल मचने के बाद माता पार्वती से शंकर ने वचन लिया कि सबसे पहले हमारे पुत्र गणपति की पूजा होगी, तभी इसका लाभ सर्वजन को मिलेगा।

भगवान शंकर जब त्रिपुरासुर नामक राक्षस के साथ युद्ध करने के लिए रणभूमि में गए तो उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैलाशपति के रथ का पहिया तक टूट गया और वह घायल भी हो गए थे। ऐसे में कैलाश पर्वत पर वापस आकर माता पार्वती को भगवान शंकर ने सारा वृतांत सुनाया। माता पार्वती ने कहा कि आप बिना गणपति पूजन के युद्ध में गए थे। इसीलिए आपको विपत्तियों का सामना करना पड़ा। इसलिए अपने वचन का पालन करें।

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भगवान शिव ने कैलाश पर्वत पर बड़ी धूमधाम से गणपति पूजन उत्सव किया और तत्पश्चात त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध कर विजय प्राप्त की। भगवान शिव ने कहा कि जो भी कोई भी कार्य करने से पूर्व गणपति महाराज का पूजन करेगा, उसे यश, वैभव, कीर्ति, धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहेगी। कथा के दौरान कथा व्यास ने बीच-बीच में मधुर भजन भी सुनाए, जिस पर श्रद्धालु झूमते रहे। कथा के समापन पर आरती की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़कर भाग लिया। बाद में भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।