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संत बाबा बिहारी जी की जन्मस्थली पर शुरू हुआ मूर्ति स्थापना समारोह, 29 जुलाई को होगा संत बाबा बिहारी जी की मूर्ति का अनावरण

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The idol installation ceremony has commenced at the birthplace of Sant Baba Bihari Ji; the unveiling of the idol is scheduled for July 29

mahendra india news, new delhi
 सिरसा की संत परम्परा में प्रमुख स्थान रखने वाले संत बाबा बिहारी जी की सूरतगढ़िया बाजार में अरोड़ा सुनार वाली गली स्थित जन्मस्थली को भव्य रूप दिया गया है। संत बाबा बिहारी जी की जन्मस्थली में उनकी दिव्य और भव्य मूर्ति स्थापित की गई है। मूर्ति स्थापना का पंच दिवसीय पूजन कार्यक्रम आज विधिवत शुरू किया गया। मंत्रोच्चारण के बीच श्री बाबा बिहारी स्मृति चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिंद कांडा, श्री बाबा बिहारी समाधि के मुख्य सेवक गुलाब राय, समाजसेवी कपिल सोनी ने मूर्ति स्थापना कार्यक्रम शुरू किया। आगामी 29 जुलाई को विशाल भंडारे के साथ ही मूर्ति का अनावरण होगा।
श्री बाबा बिहारी स्मृति चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिंद कांडा ने संत बाबा बिहारी जी को नमन किया। साथ ही बाबा जी की जन्मस्थली वाले मकान को दान देने वाले कपिल सोनी परिवार को साधुवाद दिया।


उन्होंने बाबा जी की तपस्या पर चर्चा की।
सिरसा धर्मनगरी है। यहां चारों दिशाओं में डेरे हैं। सरस्वती नदी के किनारे बसे इस शहर में बाबा बिहारी भी एक ऐसे संत हुए जिन्होंने लोगों को अध्यात्म जीवन दर्शन करवाया। उनकी स्मृति में साल 1972 में रानियां रोड पर बाबा बिहारी समाधि बनाई गई। अपने जीवन के अंतिम 6 माह तक बाबा बिहारी शहर की अरोड़ा सुनारों वाली गली में स्थित अपने मकान में रहे। अब उनकी जन्मस्थली को मंदिर का रूप दिया गया है। बाबा बिहारी जिस कमरे में रहते थे। उसमें उनका स्वरूप स्थापित किया गया है।


 ने बताया कि बाबा बिहारी जी का जन्म 18 अगस्त 1896 में हुआ उनके पिता मग्घर मल एक कारोबारी थे। मां अकी देवी धर्मपरायण स्त्री थी। उनके भाई बल्लीराम पिता के साथ व्यवसाय करते थे। करीब 18 वर्ष की आयु में बाबा बिहारी का विवाह भावदीन के एक परिवार में जमना देवी के साथ हुआ। बाबा बिहारी शिव के भक्त थे। अरोड़ा सुनारों वाली गली स्थित जिस मकान में उनका जन्म हुआ उसी मकान में जीवन के अंतिम समय में छह माह तक रहे।
 इसी मकान में 1971 को उन्होंने चोला छोड़ा। इसके बाद मकान कई बार बिक गया। इस समय यह मकान स्व. सतीश कुमार जोड़ा के पुत्रों कपिल सोनी व शिवम सोनी के पास था। दो साल पूर्व सोनी परिवार ने यह मकान श्री बाबा बिहारी स्मृति चैरिटेबल ट्रस्ट को दान दे दिया।
 श्री बाबा बिहारी समाधि के मुख्य सेवक गुलाब राय गुज्जर ने बताया कि दो साल में इस मकान का जीर्णोद्धार ट्रस्ट द्वारा करवाया गया। जिस कमरे में बाबा ने जीवन का अंतिम चरण पूरा किया उस कमरे में बाबा बिहारी की मूर्ति स्थापित कर इस आवास को मंदिर का रूप दिया गया। आज से पूजा अर्चना शुरू की गई। 29 जुलाई को मूर्ति स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न होंगे और विशाल भंडारा भी लगाया जाएगा। इसके बाद बाबा बिहारी का यह आवास आम लोगों के दर्शनों के लिए खुल जाएगा।

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 बाबा बिहारी की जन्मस्थली यानी उनके मकान को बाबा जी के ट्रस्ट को दान करने वाले कपिल सोनी एवं शिवम ने बताया कि अपने दिवंगत पिता की इच्छानुसार उन्होंने ट्रस्ट को यह मकान सौंप दिया। अब दिव्य रूप दिया जा रहा है। मूर्ति स्थापना का कार्य शुरू हो गया है।
 आज मूर्ति स्थापना पर शुरू हुई पूजा अर्चना में मुख्य यजमान के रूप में श्री बाबा बिहारी जी स्मृति चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिंद कांडा, श्री बाबा बिहारी समाधि के मुख्य सेवक गुलाब गुज्जर, मकान दानी कपिल सोनी, शिवम सोनी शामिल हुए। पंडित राम दुलारे दीक्षित, चन्द्रमोहन भार्गव व राजन भार्गव ने पूजा शुरू करवाई। आरती के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। पूजा-पाठ के आयोजन 29 जुलाई की सुबह तक चलेंगे। 29 जुलाई को मूर्ति स्थापना का कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद विशाल लंगर भंडारा लगाया जाएगा।