पितृ दोष से मुक्ति पाने का इस दिन महासंयोग, पितृ तर्पण की सही विधि, 7 पीढय़िां होंगी तृप्त
भीष्म अष्टमी को लेकर हर वर्ष इंतजार रहता है। वैसे देखे तो हिंदू धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का खास महत्व है। भीष्म अष्टमी के रूप में इस दिन को मनाया जाता है। इस वर्ष यह भीष्म अष्टमी 26 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी है। यह वह दिन है जब महाभारत के महानायक पितामह भीष्म ने अपनी इच्छा से शरीर का त्याग किया था। ज्योतिषचार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि भीष्म अष्टमी के धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों का तर्पण करने से पितृ खुश होते हैं। साथ ही कुंडली से पितृ दोष समाप्त होता है।
क्यों होता है इस दिन भीष्म पितामह का तर्पण
ज्योतिषचार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि भीष्म पितामह बाल ब्रह्मचारी थे, इसलिए उनकी कोई अपनी संतान नहीं थी जो उनका श्राद्ध या तर्पण कर सके। उनकी इसी निष्ठा और त्याग से खुश होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि जो व्यक्ति भीष्म अष्टमी के दिन आपके निमित्त तर्पण और जल अर्पण करेगा, उसके पितरों को तृप्ति मिल जाएगी और उसकी जिंदगी से पितृ दोष के अशुभ प्रभाव कम हो जाएंगे। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन तर्पण करने से 7 पीढय़िों के पितर तृप्त होते हैं और स्वजनों में सुख और शांति आती है।
ये पितृ तर्पण की सही विधि
ज्योषिचार्य पंडित नीरज शर्मा के अनुसार
भीष्म अष्टमी पर पितरों की शांति के लिए दोपहर के वक्त यानी कुतप काल में तर्पण करें।
इसके लिए सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
एक तांबे या पीतल के पात्र में शुद्ध जल लें।
उसमें गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल, अक्षत और जौ मिलाएं।
दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी पहनें या हाथ में कुशा लेकर जल को अंजलि से धीरे-धीरे पात्र में छोड़ें।
तर्पण करते समय पितरों के वैदिक मंत्रों व इस मंत्र ''वैयाघ्रपादगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय सर्वभूतहिताय च॥" का जप करें।
पितरों के तर्पण के साथ-साथ भीष्म पितामह का ध्यान करें और उन्हें जल चढ़ाएं।
यह करें उपाय)
भीष्म अष्टमी के दिन काले तिल और गुड़ का दान करने से राहु-शनि के दोषों और पितृ दोष से राहत मिलेगी
शाम के वक्त दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाएं या पीपल के वृक्ष के नीचे दीया रखें।
इस दिन तामसिक भोजन और विवादों से दूर रहें। इसी के साथ ही मन में श्रद्धा का भाव रखें।
