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भाग्य बदलने वाली है यह संक्रांति, सूर्य और पितृ दोष दूर करने के लिए यह छोटा सा काम

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This Sankranti is going to change your destiny, do this small work to remove the Sun and ancestral defects

  हर वर्ष मकर संक्रांति का इंतजार रहता है। क्योंकि हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह त्योहार तब मनाया जाता है जब सूर्य देव धनु राशि को छोडक़र अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। सिरसा के ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि इस वर्ष 2026 की मकर संक्रांति न केवल ऋ तु परिवर्तन का संकेत है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यह सूर्य दोष और पितृ दोष को शांत करने का एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ अवसर भी है। इस दिन किए गए स्नान, दान और तर्पण से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का विवरण इस प्रकार है:
तिथि : 14 जनवरी 2026
सूर्य का प्रवेश: दोपहर 03:13 बजे (धनु से मकर राशि में)
स्नान-दान का शुभ वक्त: दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक।

2. सूर्य दोष शांति के उपाय
ज्योतिषचार्य ने बताया कि जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य कमजोर है या मान-सम्मान में कमी महसूस होती है, उन्हें निम्न उपाय करने चाहिए:
तांबे के लोटे से अर्घ्य: सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्य को जल दें।

विशेष मिश्रण: जल में गुड़ और लाल चंदन मिलाना अनिवार्य है, क्योंकि यह सूर्य देव को प्रिय है।

मंत्र शक्ति: जल देते समय "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:" का जाप करें। इससे आत्मविश्वास और सेहत में सुधार होता है।

3. पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि पितरों की नाराजगी घर में कलह और आर्थिक तंगी लाती है। इसे शांत करने के लिए संक्रांति पर यह कार्य करें:

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तिल का अर्घ्य: सूर्य को जल देते वक्त उसमें काले तिल और लाल फूल डालें। यह सीधे पितरों को तृप्त करता है।

तर्पण और मंत्र: "ॐ पितृदेवाय नम:" मंत्र का जाप करते हुए पितरों का ध्यान करें।परोपकार: इस दिन गाय, कुत्ते और कौवों को भोजन खिलाए। माना जाता है कि पितर इन रूपों में आकर अपना भाग ग्रहण करते हैं।

शाम का दीपदान: इसी के साथ ही शाम को घर के दक्षिण कोने में एक दीपक पितरों के नाम से जरूर जलाएं।

4. दान और परंपरा
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी के दान और सेवन का विशेष महत्व है। इस दिन तिल, गुड़, चावल और गर्म कपड़ों का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी के साथ ही, उत्तर भारत में पतंग उड़ाने की परंपरा मनोरंजन के साथ-साथ सूर्य की किरणों के संपर्क में आकर स्वास्थ्य फायदा लेने का भी एक तरीका है।