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नवरात्रि का पांचवां दिन आज, मां स्कंदमाता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और भोग जानें

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Worship of Goddess Skandamata on the fifth day of Navratri: Learn about her preferred offerings and the worship ritual

 mahendra india news, new delhi

शारदीय नवरात्रि के 5वें दिन आज वीरवार को मां स्कंदमाता की पूजा होगी। मां स्कंदमाता को नवदुर्गा का 5वां स्वरूप माना जाता है। इस शुभ दिन मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। इसलिए भगवान स्कंद की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। 


मां स्कंदमाता की 4 भुजाएं हैं। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय बाल रूप में विराजमान रहते हैं। मां का वाहन सिंह है और उनके चेहरे पर सूर्य जैसा तेज है। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली परेशानियों से लडऩे की शक्ति मिलती है।

मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त 
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन को उपांग ललिता व्रत भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि 14 अक्तूबर को रात 1 बजकर 14 मिनट से लेकर 15 अक्तूबर की रात्रि 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र पूरे दिन रहेगा इसके अलावा रात्रि 9 बजकर 15 मिनट तक सौभाग्य योग बना हुआ है। सुबह 7:32 बजे से लेकर 7:47 बजे और सुबह 10:15 बजे से लेकर दोपहर 12:38 बजे तक पूजा का शुभ समय रहेगा। हालांकि, दोपहर 2:30 बजे से लेकर 4:00 बजे तक राहु काल रहेगा। ऐसे में दुर्गा सप्तशती पाठ करना शुभ माना जाएगा।

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मां स्कंदमाता की पूजा विधि 
नवरात्रि के 5वें दिन मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
इसके लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान पर गंगाजल छिडक़कर उसे शुद्ध करें।
लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर स्कंदमाता की तस्वीर स्थापित करें।
मां स्कंदमाता का ध्यान करें और मां को पीले फूल, श्रृंगार का सामान और पीले वस्त्र अर्पित करें।
इसके बाद मां को इलायची, लौंग और पान का पत्ता चढ़ाएं।
पूजा के दौरान मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक 108 बार जाप करें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और व्रत कथा सुनें।
अंत में मां स्कंदमाता की आरती करें और प्रसाद सबमें बांट दें।

Maa Skandamata Mantra

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 Maa Skandamata Bhog

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को पिले रंग की वस्तुओं का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां को केसर की खीर, पीले रंग की मिठाई और पीले रंग के मौसमी फल अर्पित कर सकते हैं। मां स्कंदमाता को श्रद्धापूर्वक भोग लगाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

नवरात्रि के पांचवें दिन की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम के असुर ने ब्रह्माजी से वरदान पाया था कि उसकी मृत्यु केवल शिवजी के पुत्र के हाथों होगी। उस समय शिवजी तपस्या में लीन थे और उनका विवाह भी नहीं हुआ था। इस वरदान के बल पर तारकासुर तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा।

देवताओं की प्रार्थना पर माता पार्वती और शिवजी का विवाह हुआ और उनके पुत्र कार्तिकेय यानी स्कंद का जन्म हुआ। मां पार्वती ने ही उन्हें युद्ध की कला और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान दिया। आगे चलकर भगवान कार्तिकेय देवताओं की सेना के सेनापति बने और उन्होंने तारकासुर का वध किया। अपने पुत्र को गोद में लिए मां पार्वती का यही रूप स्कंदमाता के नाम से पूजा जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।