home page

लाइफ कभी भी दूसरा चांस नहीं देती, इसलिए अपने अभावों को ताकत बनाकर जीना सीखे विद्यार्थी

 | 
Life never gives a second chance, so students should learn to live by turning their shortcomings into strengths

mahendra india news, new delhi

लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ डेवलपमेंट मेंटर।
मैं बहुत इमोशनल लेख लिखने का प्रयास कर रहा हूँ, खासकर उन विद्यार्थियों के लिए जो अपने जीवन में बहुत अभावों से गुजरते है, बहुत सी कठिनाइयों का सामना करते है, बड़ी बड़ी चुनौतियों का सामना करते है। यहां किसी प्रकार की सुविधाओं की बात नहीं की जा रही है, केवल आधारभूत जरूरतों की बात की जा रही है। लेकिन इसके साथ ही मैं देश के सभी विद्यार्थियों को महान गुरु, गुरुगोविंद सिंह जी के वीर पुत्रों अमर शहीद अजीत सिंह जी तथा अमर शहीद जोरावर सिंह जी के महान व अमर बलिदान की याद दिलाना चाहता हूँ

जिन्होंने राष्ट्र धर्म के लिए अपने बालपन में ही प्राणों की आहुति दी। उनके बलिदान को ध्यान में रखकर, सभी विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाना चाहता हूं और कहना चाहता हूं कि आज की समस्या तो उन वीर बालकों की समस्या के सामने कुछ भी नहीं है। मैं अपने इस विमर्श को उन्ही महान बलिदानियों को समर्पित करना चाहता हूँ जिन्होंने बचपन में ही सर्वोच्च्य बलिदान किया। मैं उन अभाव ग्रस्त बच्चों को भी कहना चाहता हूं, जो जीवन शुरू होते ही हजारों परेशानियों का सामना करते है, ऐसे बाल विद्यार्थियों को भी अमर शहीद अजीत सिंह तथा अमर शहीद जोरावर सिंह का ध्यान, मन में रखना चाहिए , जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी थी, वो भी भारत के बच्चे ही तो थे और तुम भी भारत के ही बच्चे हो, तुम भी इस राष्ट्र की ताकत हो। दोस्तों इस देश में टेलेंट की कमी नहीं है, अगर कमी है तो सिर्फ उनको अवसर मिलने की हैं। कुछ लोग है, जिनके पास सबकुछ है लेकिन राष्ट्र को देने के लिए कुछ भी नहीं है।

हां उनके पास पैसा अधिक है लेकिन वो उसमें भी चोरी करते है, अपना टैक्स भी ईमानदारी से नहीं भरते हैं, राष्ट्र का हिस्सा देने में भी उन्हें परेशानी होती है, जिसका खामियाजा उन लोगों भुगतना पड़ता है जिनके पास टेलेंट तो बहुत है परंतु उनके पास अभावों का पिटारा भी हैं। जिसकी वजह से देश के ऐसे कोहिनूरों को मौका ही नहीं मिलता हैं, जिन्होंने जन्म तो भारत देश को गौरांवित करने के लिए लिया है, लेकिन उनकी परिस्थितियां जरा मुश्किल है।

WhatsApp Group Join Now

मेरे देश के युवा नागरिकों ज्ञान की परम्परा है, उनके पास कर्मठता है, उनके पास जज्बा भी है, जो हर क्षेत्र में विश्व में अपना लोहा मनवा सकते है, लेकिन उन्हें इसके लिए मोटिवेट करने की जरूरत है कि वो अपने संघर्षों तथा अपने अभाव को ही अपनी ताकत बनाना सीखे। मैं उन बच्चों से बात कर रहा हूँ जिनके मातापिता के पास अधिक पैसा नहीं है, जिनके पास अधिक संसाधन नहीं है, लेकिन उनके पास हौंसले हैं, उनके पास ताकत है, उनके पास हिम्मत है,

वो भूखे प्यासे रह सकते है, वो नंगे पैर चल सकते है, वो सर्दियों में भी बिना स्वेटर के रह सकते है, उनके पास ऐसे मातापिता नहीं है जो उन्हें खाना खिलाने के लिए भी उनके पीछे पीछे दौड़ते है, उनके पास ऐसे पेरेंट्स भी नहीं है जो अपने 11 या 12 साल की उम्र होने पर भी बच्चों के मुंह में खाना अपने हाथों से डालते हैं। मैं यहां उन बच्चों की बात कर रहा हूँ जो अगर पढ़ाई के क्षेत्र की बात करूं तो वो चाय की रहड़ी लगाकर अपनी फीस के पैसे जुटाते है, वो सुबह घरों में अखबार फेंक कर अपनी पढ़ाई का खर्च निकालते है, वो पुस्तके भी सेकंड हैंड लेकर ही अपनी पढ़ाई पूरी करते है, इनके मातापिता अमीरों के घरों में झाड़ू पोछा करके ही उन बच्चों का भोजन, पुस्तकों, उनकी फीस तथा दवा का खर्चा जुटा पाते है। किसी किसी के पेरेंट्स रिक्शा चालन करके अपने इन बच्चों को पढ़ाते हैं, फिर भी ये बच्चे अपने राष्ट्र के लिए वैज्ञानिक बनते है, ऐसे बच्चे खेलों में देश को गोल्ड मेडल दिलाने का कार्य करते है, ऐसे बच्चे बड़े बड़े कृषक बनते है,ऐसे ही बच्चे भारत का नाम ऊंचा करने के लिए कंस्ट्रक्शन के कार्यों में लगते हैं, लेबर का काम करते है, लोगो की गाड़ियां साफ करते है फिर भी इस राष्ट्र के नाम अपना जीवन करते है। मैं उन बच्चों की बात कर रहा हूँ जिनकी कमर पर पहने कच्छे की इलास्टिक ढीली होने  के कारण बार बार ऊपर करने की प्रक्रिया दोहराई जाती है, तब भी वो नंगे पैरों से भागते है और बहुत अच्छे खिलाड़ी बनकर देश को गौरांवित करते हैं।

मैं उन पैसे वाले मातापिता के बच्चों की बात तो बिल्कुल नहीं कर रहा हूँ जो एक तय फार्मूले के तहत अपने छोटे बच्चों को अपनी गाड़ी में बिठा कर सबसे पहले उन्हें स्केटिंग कराने के लिए लेकर जाते  है, इस पर बहुत से पैसे खर्च करते है, फिर उनके लिए स्विमिंग सूट खरीदते है ताकि वो तैराक बन सकें, फिर उसको भी छोड़कर वो अपने बच्चों के लिए जुड़ों कराटे की यूनिफॉर्म खरीदते है और इस खेल में बच्चों को आजमाते है, वहां से बच्चों का मन भरने के बाद फिर क्रिकेट के मैदान पर लेकर जाते है, उनके लिए कई हजार रुपए के किटबैग खरीदते है, वहां भी कुछ ना कर पाने के कारण सभी खेलों को छोड़ कर फिर पढ़ाई लिखाई में झोंक दिया जाता है लेकिन वहां भी राष्ट्र को देने लायक उनके पास कुछ नहीं होता हैं। जहां बच्चे आराम दायक जोन में रहकर पलते हो, जहां संघर्ष है ही नहीं, उनमें जज्बा पनप ही नहीं पाता है और वो सदैव कमजोर ही रहते है। जीवन तो भाई अभावों में ही पलते है, जीवन तो बस कठिनाइयों में पलते है, बस जरूरत है तो अपने अभावों को ताकत में बदलने की ,अपने जीवन के संघर्षों को अपनी शक्ति में बदलने की, जिससे कि वो अभाव हमारे उन बच्चों की सफलता के रास्ते बन जाएं ,जो वास्तव में राष्ट्र को कुछ देना चाहते हैं।

मैं उन विद्यार्थियों को जिनको अपनी यूनिफॉर्म बनवाने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है, कहना चाहता हूँ कि किसी के सामने हाथ पसारने की बजाय अपनी चुनौतियों को ही ताकत में बदलो, क्योंकि हाथ पसारना आपकी कमजोर कड़ी को प्रदर्शित करती है, और हर अमीर उसी का लाभ लेने की कोशिश करता है, वहीं आपके स्वाभिमान को खरीदने की कोशिश करता है। जीवन में अभावों को ताकत में बदलने के लिए सभी विद्यार्थियों को अपने जीवन में नौ कार्य करने होंगे, जिससे कि वो खुद को समृद्धशाली बना सकें, जैसे;
1. अपनी जरूरतों को कम करें, किसी के  देखा देखी अनावश्यक जरूरतों को न पाले। अपने ध्यान को कपड़ों, जूतों, अन्य बिना जरूरत की वस्तुओं में ना उलझाएं। कम संसाधनों में जीना सीखे।


2. अपने दिन के 24 घंटों का सदुपयोग करें। इसमें मनोरंजन के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जीवन प्लेजर के लिए नहीं है, केवल हैप्पीनेस के लिए है।
3. पैसों की कमी को कभी भी अपने ऊपर हावी ना होने दे, उसके कारण हीनभावना का शिकार न बनें। कुछ लोग होते है जिनके पास कुछ अधिक  होता है, वो आपके सामने पैसों की शेखी मरेंगे, परंतु तुम्हे ऐसी किसी मन भटकाने वाली बातों में नहीं फंसना है।
4. अपनी पढ़ाई के साथ साथ अपने परिवार के कार्यों में भी हाथ बटाना होगा, जिससे तुम्हारे संकल्प सशक्त बन सकें और अपनी शिक्षा के लिए धन जुटाने में सफल हो सकें।


5. अपने ध्येय को कमजोर ना होने दे, साथियों यहां 80 प्रतिशत लोग तो बिना किसी उद्वेश्य के ही जीते है। अगर आप की प्रतिस्पर्धा है तो केवल 10 प्रतिशत विद्यार्थियों के साथ ही है, घबराने की जरूरत नहीं है।
6. जो बच्चे अभावों में जीवन का गुजर बसर कर सकते है उनके सामने मेहनत, मेहनत व परिश्रम के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर मेहनत कर ली तो सारा जहान आपके कदमों में होगा।
7. किसी के आगे अपने अभावों का रोना मत रोना, दुनिया दूसरों पर केवल हंसना  जानती है। कोई आपके साथ खड़ा होने वाला नहीं है। मेहनत को सभी सलाम करते है। अगर आप कुछ बन गए तो सब आपके रिश्तेदार बन जाएंगे है, अन्यथा आपके खुद के रिश्तेदार भी तुम्हारे नहीं होंगे, आपको पहचानने से भी मना कर देते है।


8. संघर्ष को अपना साथी बनाओ, परिश्रम को अपना दोस्त बनाओ, ईमानदारी को अपना फ्रेंड बनाओ। जिनके पास ना ईमानदारी है, ना सत्यता है, ना निष्पक्षता है, और ना निर्भयता है, उनका साथ पाने के लिए कभी भी अपना समय मत बेकार करना, क्योंकि उनके पास तुम्हे देने को कुछ भी नहीं है। जीवन को नकली शेखी में मत गवाना, क्योंकि उससे तुम्हारा कोई भला होने वाला नहीं है, सच्चाई एक दिन सबके सामने आती है, परिणाम एक दिन सबके सामने आता है।


9. ऐसे विद्यार्थी जिस भी विधा में अच्छे है उसी यज्ञ में अपना संपूर्ण स्वाहा कर दो, उसी में अपनी पूरी ताकत झौंक दो, उसी में अपनी सारी शक्ति लगा दो, जिससे आपका परिणाम बेहतरीन हो। जीवन की सबसे बड़ी शक्ति ब्रह्मचर्य में है उसको किसी भी कीमत पर नहीं गवाना है चाहे दुनिया इधर से उधर हो जाए, क्योंकि वो ही तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य तक पहुंचाएगी।


    मैं यहां बहुत ही ईमानदार से कहना चाहता हूँ कि जीवन केवल मेहनत से चलता है, केवल परिश्रम से चलता है, केवल स्वयं के प्रति ईमानदारी से चलता है। अपनी जिंदगी को अंगारों के हवाले कर दो, कांटो पर चलना सीखों, अंगारों पर चलना सीखों, आराम दायक जीवन जीने की सोचों भी नहीं, बिना मेहनत के जीवन का एक पल भी नहीं गुजरना चाहिए। कदम कदम पर भटकाने वाली गतिविधियां तथा संगत मिलेगी परंतु भटकना नहीं है।

भगवान श्रीकृष्ण जी महाराज ने श्रीमद्भगवद् गीता के दूसरे अध्याय के 37 वें श्लोक में कहा है कि" हतो वा प्राप्यससी स्वर्गम जितवा वा भोग्यशयी महिम। तस्मात उतिष्ठ अर्जुन: युद्धाय कृत निश्चय।।" अर्थात हे अर्जुन उठो और युद्ध करो, अगर मारे जायेगे तो स्वर्ग मिलेगा और अगर जीतोगे तो श्रेष्ठता का आनंद प्राप्त होगा, महिमामंडन होगा। इसलिए उठो और युद्ध करो। यहां एक आम विद्यार्थी जो अभावों से परेशान है उन्ही को ध्यान में रखकर  कह रहा हूँ कि जीवन में लड़ने के सिवाय यानी मेहनत के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। मैं तो केवल अभाव ग्रस्त विद्यार्थियों की ही बात कर रहा था, परंतु मैं यहां उन बच्चों को भी एक सलाह अवश्य देना चाहूंगा,

जो अपने मातापिता के पैसों पर खूब मनोरंजन करते है, अच्छे कपड़े पहनते है, वस्त्रों का अंबार लगा कर रखते, अपने मातापिता की आमदनी के पैसों से या मै यूं कहूं कि अपने पेरेंट्स की मेहनत को ही अपना सब कुछ मानकर बैठ गए है और जीवन को आलस्य, आमोद विनोद में काट रहे है, गाड़ियां दौड़ा रहे है, वो भी जीवन में अपना आलस्य छोड़े और कम से कम इतना ही कर ले कि जो जरूरतमंद है और जिन्हें राष्ट्र के गौरव के लिए कुछ करना है उन्हें ही थोड़ा बहुत सहारा देने का प्रयत्न करें, उन्हें ही थोड़ा मदद करने का संकल्प लें, उन्हें ही प्रोत्साहित करने का कार्य करें, जिससे तुझे भी जीने का कुछ तो आनंद मिल सकें और वह खुद को भी इंडिपेंडेंट खड़ा करने की कौशिश करे।

तुम्हारे सामने भी बड़े से बड़ा अधिकारी, राजनीतिज्ञ, बिजनेस मेन, बड़े से बड़ा खिलाड़ी बनने का अवसर तो है ही, सभी संसाधन भी है, धन दौलत भी है। अगर इतने से भी अधिक पैसा है तो ऐसे बच्चों की मदद करें, जिन्हे जरूरत है। वर्तमान समय अति भौतिकवाद का है इसमें कोई किसी की परवाह नहीं करते है, आप को कोई पूछने वाला नहीं है। इसलिए कहीं पर भी बिना वजह अतिव्ययता न करें। जीवन को सरल बनाए तथा शारीरिक रूप से तथा मानसिक रूप से सशक्त बनें। अपने अभावों को शक्ति में बदले और कुछ बड़ा करने का संकल्प इसी क्षण लें।
जय हिंद, वंदे मातरम