स्वामी विवेकानंद जयंती : युवाशक्ति, शिक्षा और आत्मविश्वास से राष्ट्र निर्माण: प्रो. जयप्रकाश
सिरसा:: स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक प्रो डॉ जयप्रकाश ने अपने संदेश में, विशेषकर युवा पीढ़ी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संन्यासी नहीं थे, बल्कि वे भारत की आत्मा के जाग्रत स्वर थे, जिन्होंने युवाओं को अपने भीतर छिपी असीम शक्ति को पहचानने का संदेश दिया। उनका जीवन, विचार और कर्म आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ हैं।
स्वामी विवेकानंद का स्पष्ट विश्वास था कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके युवाओं के चरित्र, शिक्षा और आत्मविश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा था कि उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत। यह वाक्य केवल प्रेरक नारा नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम और संकल्प का जीवन दर्शन है। आज जब हमारा देश अमृतकाल की ओर अग्रसर है, तब विवेकानंद जी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका दृष्टिकोण अत्यंत व्यापक और व्यावहारिक था। वे ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे जो केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न होकर व्यक्ति के चरित्र निर्माण, आत्मनिर्भरता और सेवा भावना को विकसित करे। जेसीडी विद्यापीठ में हम इसी विचारधारा को अपनाते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर प्रयासरत हैं, ताकि वे न केवल सफल पेशेवर बनें, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बन सकें।
स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और विज्ञान के संतुलन पर विशेष बल दिया। उन्होंने विश्व मंच पर भारत की वैचारिक शक्ति को प्रतिष्ठित किया और यह सिद्ध किया कि आत्मिक बल ही वास्तविक शक्ति है। आज के वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में हमें उनकी शिक्षाओं से यह सीख मिलती है कि नैतिकता और मानवीय मूल्यों के बिना प्रगति अधूरी है।
जेसीडी विद्यापीठ परिवार का यह दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। हम युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक साहस, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार भी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्वामी विवेकानंद के विचार हमें निरंतर यह स्मरण कराते हैं कि स्वयं पर विश्वास ही सफलता की पहली सीढ़ी है। यदि हमारे युवा आत्मबल, अनुशासन और सेवा भावना को अपनाएं, तो भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अवश्य अग्रसर होगा।
इस पावन अवसर पर मैं सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान करता हूं कि वे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें। जब युवा अपने कर्तव्यों को समझकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे, तभी सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा। यही स्वामी विवेकानंद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यही हमारा संकल्प और निरंतर प्रयास रहेगा सदैव।
