आज से 6 बड़े नियम बदलने जा रहे हैं, बैंकिंग से लेकर डिजिटल पेमेंट में बदलाव होगा

आज मंगलवार 1 अप्रैल 2025 से कई नियमों में बदलाव हो गया है, बदले गये नियम आम व्यक्तियों को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे। आपको बता दें कि बैंकिंग जीएसटी इनकम टैक्स और डिजिटल पेमेंट जैसे कई प्लेटफॉर्म पर बदलाव किए गये हैं। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया आज से यानि एक अप्रैल से ऐसे मोबाइल बैंकों के यूपीआई ट्रांजेक्शन को बंद करने वाली है जो लंबे से इनएक्टिव हैं।
जानिए आज से किन नियमों में बदलाव किया जा रहा है।
आज से यूपीआई नियमों में बदलाव
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया आज मंगलवार से यानि एक अप्रैल से ऐसे मोबाइल बैंकों के यूपीआई ट्रांजेक्शन को बंद कर दिया जाएगा, यह लंबे समय से इनएक्टिव हैं। यानी अगर आपके बैंक अकाउंट से कोई पुराना नंबर लिंक है जो लंबे वक्त से बंद है तो यूपीआइ ट्रांजेक्शन को जारी रखने के लिए पहले बैंक अकाउंट से नया नंबर लिंक कराना जरूरी होगा।
ये भी, डोरमेंट अकाउंट किए जाएंगे बंद
इसी के साथ ही आज से एनपीसीआई धोखाधड़ी और फिशिंग स्कैम को रोकने के लिए 12 माह में इस्तेमाल नहीं किए गए यूपीआइ आइडी को डिसेबल कर देगा। जो उपभोक्ता अपनी डोरमेंट यूपीआइ आइडी को फिर से एक्टिवेट नहीं करते हैं वह उन्हें पूरी तरह से खो सकते हैं। इसके लिए डिजिटल पेमेंट करने के लिए डोरमेंट को फिर से एक्टिव करना जरूरी होगा।
एलपीजी गैस सिलेंडर के रेटों में होगा बदलाव
इसी के साथ ही एक अप्रैल से तेल कंपनियां घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर के रेटों में बदलाव कर सकती हैं इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
नए टैक्स नियम होंगे लागू
इसी के साथ ही आज से वार्षिक 12 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री होगी लेकिन यह राहत केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगी जो नए टैक्स रिजीम का चुनाव करते हैं। यानी अब से नया टैक्स सिस्टम डिफाल्ट होगा। अगर कोई टैक्सपेयर 80सी का फायदा लेने के लिए पुराना टैक्स रिजीम के तहत टैक्स फाइल करना चाहता है तो उसे इसका विकल्प अलग से चुनना होगा।
डिविडेंड पाने के लिए पैन-आधार करना होगा लिंक
इसी के साथ ही अगर आपका पैन-आधार लिंक नहीं है तो आज से ऐसे व्यक्ति को स्टाक्स पर डिविडेंड का फायदा नहीं मिल सकेगा। इसी के साथ ही कैपिटल गेन पर टीडीएस की कटौती भी बढ़ जाएगी।
न्यूनतम बैलेंस रखना जरूरी
इसी के साथ ही अगर बचत खाते में बैलेंस नहीं है तो बैंक जुर्माना लगा सकते हैं। विभिन्न बैंकों की मिनिमम बैलेंस लिमिट अलग-अलग हो सकती हैं।