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थाईलैंड की यह घास पशुओं को खिलाकर पशुओं का बढ़ाएं दूध, गर्मी के मौसम में देता है ठंडक

 एक बार लगाने के बाद यह करीबन 7 से 8 साल तक हरा चारा होता है 
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नेपियर घास

mahendra india news, new delhi
गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, इस मौसम में जैसे जैसे गर्मी बढ़ती है, पशुओं का दूध कम होना शुरू हो जाता है। इससे पशुपालक भी चिंता में होते हैं। इस मौसम में हरा घास की भी कमी हो जाती है। लेकिन अब पशु पालक किसान थाईलैंड की नेपियर घास को कम पानी में उगाकर इसे पशुओं को खिलकार दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं।इस घास की खास बात ये भी है कि इसे एक बार लगाने के बाद यह करीब 7-8 वर्ष तक हरा चारा का उत्पादन होता है। 

आपको बता दें कि विदेशी धरा की सुपर नेपियर घास आसमां को छू रही है, नेपियर घास की बुआई के लिए बीज का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि घास के डंठल का प्रयोग होता है, इसे नेपियर स्टिक कहते हैं, इस डंठल को खेत में डेढ़ से दो फीट की दूरी पर लगाया जाता है, नेपियर घास जिसे सदाबहार हरा चारा भी कहा जाता है,  एक बारहमासी चारा फसल है। 

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बता दें कि इसके पौधे गन्ने की तरह लंबाई में बढ़ते हैं, इसे हाथी घास के नाम से भी जाना जाता है। हाइब्रिड नेपियर घास अधिक पौष्टिक और उत्पादक होती है। इससे पशुओं में दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ती है.


30 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन 
आपको बता दें कि हरी घास की तुलना में नेपियर घास में 25-30 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन होता है, इसी के साथ ही इसमें 40 प्रतिशत क्रूड फाइबर पाए जाते हैं। कृषि वैज्ञानिक डा. देंवेंद्र ने बताया कि नेपियर घास की बुवाई करने के बाद यह 45 दिन में पूरी तरह से तैयार हो जाती है।


उन्होंने बताया कि अगर किसान भाई गर्मी के मौसम में पशुओं को नेपियर घास खिलाते हैं, तो पशुओं में अच्छा दूध का उत्पादन होता रहता है। किसान राम सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी से जानकारी लेकर नेपियर घास की बुआई की है, ये घास पशुओं की सेहत के लिए काफी फायदेमंद रहती है। गर्मियों में इसके सेवन से ठंडक बनी रहती है, इसी के साथ ही एक बार लगाने के बाद यह करीब 7-8 वर्ष तक हरा चारा देती रहती है।