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मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत इन 21 फसलों को किया गया शामिल, योजना शुरू होने से बागवानी जोखिम फ्री : उपायुक्त पार्थ गुप्ता

फसल विविधीकरण के तहत किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी बेहतर विकल्प

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फसल विविधीकरण के तहत किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी बेहतर विकल्प

mahendra india news, new delhi
HARYANA में बागवानी किसानों के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को बढ़ाने और किसानों को खेती को जोखिम मुक्त खेती करना है। इस स्कीम के तहत किसानों की फसलों में प्रतिकूल मौसम व प्राकृतिक आपदाओं के कारण से होने वाले नुकसान की भरपाई की जाएगी। प्रतिकूल मौसम कारक तथा प्राकृतिक आपदाओं जैसे ओलावृष्टि, तापमान, पाला, जल कारक (बाढ़, बादल फटना, नहर / ड्रेन का टूटना, जलभराव), आंधी तूफान व आग जो फसल नुकसान का कारण बनते है, उन्हें इस योजना में शामिल किया जा रहा है।


हरियाणा में SIRSA के उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि इस स्कीम के तहत 21 फसलों को शामिल किया गया है, जिसमें 14 सब्जियां (टमाटर, प्याज, आलू, फूलगोभी, मटर, गाजर, भिंडी, घीया, करेला, बैंगन, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, मूली), 2 मसाले (हल्दी, लहसुन) और 5 फल (आम, किन्नू, बेर, अमरूद, लीची) शामिल है। योजना उन सभी किसानों के लिए वैकल्पिक तौर पर होगी जो मेरी फसल-मेरा ब्यौरा के तहत पंजीकृत होंगे। 


योजना के तहत आश्वस्त राशि (सम एश्योर्ड) सब्जियों व फसलों के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ व फलों के लिए 40 हजार रुपये प्रति एकड़ होगी तथा किसान का योगदान / हिस्सा आश्वस्त राशि का केवल 2.5 फीसद होगा जोकि सब्जियों में राशि 750 रुपये व फलों में राशि 1000 रुपये प्रति एकड़ होगी। मुआवजा राशि को चार श्रेणी 25, 50, 75 व 100 फीसदी में बांटा गया है।

उन्होंने बताया कि 26 से 50  फीसद के बीच फसल नुकसान की अवस्था में मुआवजा 50 प्रतिशत की दर से सब्जियों / मसालों के लिए 15 हजार रुपये व फलों के लिए 20 हजार रुपये, 51 प्रतिशत से 75 प्रतिशत के बीच नुकसान की अवस्था में मुआवजा 75 फीसद की दर से सब्जियों / मसालों के लिए 22 हजार 500 रुपये व फलों के लिए 30 हजार रुपये तथा 75 फीसद से अधिक नुकसान की अवस्था में मुआवजा 100 प्रतिशत की दर से सब्जियों / मसालों के लिए 30 हजार रुपये व फलों के लिए 40 हजार रुपये दिया जाएगा। मुआवजा राशि सर्वेक्षण पर आधारित होगी। योजना की निगरानी समीक्षा एवं विवादों का समाधान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गठित राज्य स्तर व जिला स्तर की समितियों के माध्यम से किया जाएगा।